घर लौटते वक्त, कभी कोई काम करते समय या अनायास सड़क से गुजरते हुए... न जाने कितने सालों से यह गीत मैं गुनगुना उठता हूं. बहुत सादा से शब्दों वाले इस प्रेम गीत का न जाने क्या जादू है.. जो कभी खत्म नहीं होता. लगता है कि किसी के दिल से कोई बहुत सीधी-सच्ची सी बात निकली है और अपने दिल में उतर गई है.

इसके शब्दों की सादगी में कोई ऐसा जादू है कि आप बार-बार इसके करीब जाते हैं. हर बार करीब जाने के बाद भी बहुत कुछ ऐसा है जो खुलता नहीं.. कोहरे में छिपी हुई सुबह की तरह.. या बचपन की धुंधली यादों की तरह..
यह गीत है बड़ी बहन का.. संगीत तैयार किया है हुस्नलाल-भगतराम ने और गाया है सुरैया ने. इसे लिखा है क़मर ज़लालाबादी ने. जरा इसके शब्दों पर गौर करें-
वो पास रहें या दूर रहें नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें क्या प्यार इसी को कहते हैं
इसके बाद सिर्फ दो पंक्तियां और-
छोटी सी बात मुहब्बत की, और वो भी कही नहीं जाती
कुछ वो शरमाये रहते हैं, कुछ हम शरमाये रहते हैं
मिलने की घड़ियाँ छोटी हैं, और रात जुदाई की लम्बी
जब सारी दुनिया सोती है, हम तारे गिनते रहते हैं
है ना जादू.. बहुत बार सुनने के बाद भी इस गीत से उठने वाले भाव को मैं ठीक-ठीक अभिव्यक्त नहीं कर सकता. यह गीत किशोरवय के दौरान उदास गर्मियों की रातें या शामों की याद दिला जाता है. जब हम ठिठकते हैं.. हम जो अब तक खुद पर मुग्ध थे, किसी और के जादू से खिंचे चले जाते हैं... किसी अनजान आकर्षण की ओर... ठीक उसी तरह जैसे बचपन में हम पहली बार तारों से भरा आसमान देखते हैं या बारिश में भीगते हैं या इंद्रधनुष देखते हैं
'शरमाए रहना...','तारे गिनते रहना..' या फिर 'नजरों में समाए रहना..' यह एक खास 'स्टेट आफ माइंड' है. यह उस भाव को छूता है जब किसी का 'होना' हमारी जिंदगी को मतलब देने लगता है. हम उसकी निगाहों से खुद को देखने लगते हैं. शायद उसी वक्त हम प्रेम को नाम से नहीं अहसास के जरिए जानते हैं. तभी इस गीत में बड़ी मासूमियत से पूछा जाता है, 'इतना तो बता दे कोई हमें क्या प्यार इसी को कहते हैं..'
हिन्दी गीतों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उनका नैरेटर एक खास सिचुएशन में अपनी बात कह रहा होता है. यह सिचुएशन उस गीत की फिलॉसफी से लेकर उसका व्याकरण तक तय कर देती है. यहां वाक्यों की संरचना में 'रहते हैं..' आपके मन पर एक अजीब सा असर छोड़ता है. यह गीत को तत्काल की बात नहीं बनने देता है बल्कि इसके जरिए एक वातावरण बनता है. यह वातावरण है स्थितियों और भावनाओं का...
आप सुरैया के बाकी गीतों की तरफ बढ़ें तो कई और जादुई गीत सामने आते हैं. कुछ ही उदाहरण काफी होंगे.. 'सोचा था क्या, क्या हो गया..', 'तेरे नैनों ने चोरी किया..', 'तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी..' यह लिस्ट लंबी हो सकती है, फिलहाल तो आप यह गाना सुनिए..
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